सुन्दर सुघर देखाय हो आजु अवधि नगरिया ।
वहि रे नगरिया में भवन निराले
मंगल कलश सजाय हो ।
कनक भवन सियाराम विराजे
हनुमत लक्षिमन भाय हो ।
जन्म भूमि शोभा अति न्यारी
घण्टा धुनि घहराय हो।
राम नाम धुनि कान परत जहँ
पाप भसम होई जाय हो।
सुन्दर सुघर देखाय हो आजु अवधि नगरिया ।
वहि रे नगरिया में भवन निराले
मंगल कलश सजाय हो ।
कनक भवन सियाराम विराजे
हनुमत लक्षिमन भाय हो ।
जन्म भूमि शोभा अति न्यारी
घण्टा धुनि घहराय हो।
राम नाम धुनि कान परत जहँ
पाप भसम होई जाय हो।
जगत जननी हे जगदम्बे सहारा मां तुम्हारा है।
फँसा माया में मोहित मां लाल तेरा पुकारा है।
दयामय मां दया से ही दया हरपल बरसती है।
मनोरथ साथ जो लाये मनोरथ सब परसती है।
शरण आया गवां सब कुछ उसे तुमने दुलारा है।
जगत जननी हे जगदम्बे सहारा मां तुम्हारा है।।
घनी माया के बंधन में फँसाती हो नचाती हो।
जनम-मृत्यु कराती हो हँसाती हो रुलाती हो ।
तुम्हें जो रात-दिन जपता उसे भव से उतारा है।।
जगत जननी है जगदम्बे सहारा माँ तुम्हारा है ।।
विपति आये जो बेटों पर उसे माँ सह नहीं पाती।
सवारी सिंह की लेकर चतुर्भुज रूप में आती ।
पार भव से करे उसको जिसे माँ का सहारा है।
जगत जननी हे जगदम्बे सहारा मां तुम्हारा है ।।
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नवटर वेश चतुर्भुज बँसिया सुहावनि हो ।
सखिया जनमें हैं कंस जेहलिया महलिया नंद सोहर हो ।
वहि रे जशोदा के मंदिरवा रुदन करैं कान्हा हो ।
सखिया सुनि बाबा नंद जी धावैं मोहरिया लुटावैं हो।
चेरी दौरि के देंय सनेस गोतिनि सब धावैं हो।
सखिया हींकि भरि देंय अशीष ललन मुख निरखैं हो ।
चहुँ दिश मंगल शोर सुहावन लागै गोकुल हो।
साखिया नंद बजावैं ढोल तासा लुटावै अन-धन सोनवाँ हो।
जे गावै मंगल सोहर उहै सुख पावै हो।
सखिया जनम-जनम फल पावै लवटि नाहिं आवै हो।
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जग में न कोई अपना बस तेरा सहारा है
भव पार करो मोहन अब तुम्हें पुकारा है ।।
जीवन के समन्दर में तूफान बहुत आये
जो साथ साथ चलते वो दूरियां बनाये।
दुनियाँ को देख मैंने अब तुमको निहारा है
भव पार करो मोहन...................................।।
माया के मोह में ही दिनरात फॅसा फिरता
कुछ हाथ नहीं आता उठता ही रहता गिरता ।
करुणाकर कर करुणा तुमको ही जोहारा है
भव पार करो मोहन................................. ।।
कर दिया समर्पित अब निज जीवन की नौका
इस जयप्रकाश को दो बस थोड़ा सा मौका ।
मुझको भी पार कर दो बहुतों को उबारा है
भव पार करो मोहन................................... ।।
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